रमा कॉलेज की छुट्टियों में घर आई थी. लेकिन यहां भी वह छुट्टियां बिताने के बजाय मोबाइल, लैपटॉप और असाइनमेंट के बीच हमेशा व्यस्त रहने लगी थी.
एक दिन अपने कमरे की सफाई करते वक्त उसकी नज़र एक डायरी पर पड़ी. उसने उत्सुकतावश उस डायरी को खोला. उसके पहले पन्ने पर नीली स्याही से लिखा था ...
“प्रिय बेटी रमा
तुम्हारे लिए"
"जब कभी तुम्हें अकेलापन सताने लगे,
इस डायरी को खोल कर पढ़ लेना"
"पापा"
रमा अपने पापा की लिखावट पहचानती थी, पापा की लिखावट देखकर उसको रोना आ गया... उसके पापा अब इस दुनिया में नहीं थे और आज उनका लिखा यह छोटा सा नोट उसे रुला गया.. उसने डायरी को ध्यान से खोला, यह कोई प्रसिद्ध किताब और उपन्यास नहीं थी, बल्कि उसके पापा की हस्तलिखित छोटी-छोटी कहानियों, विचारों, अनुभवों और कविताओं का एक संग्रह थी. उसके पापा को डायरी, कहानी और कविता लिखने का बहुत शौक था, जिसे वे पुरानी डायरियों में लिखा करते थे.
रमा ने डायरी में लिखी पहली कहानी पढ़ी. उसे अच्छा लगा कुछ प्रेरणा मिली, उसने अन्य कहानियां भी पढ़ने की सोची.... उसने देखा हर कहानी में एक संदेश होता था जैसे संघर्ष से कभी डरना नहीं, असफलता से कभी हार ना मानकर बल्कि उससे सीखना और रिश्तों को समय जरूर देना.
एक कहानी में उसके पापा ने लिखा था ....
“जब रास्ते धूल भरे हों, तो हिम्मत ना हारना.. खुद पर भरोसा रखना”
दूसरी में लिखा था
“सफलता का अर्थ केवल पैसा नहीं होता, मन की शांति भी जरूरी होती है”
तीसरी में लिखा था
"इंसान को पढ़ते लिखते रहना चाहिए़, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है"
डायरी के अन्य पृष्ठों को पलटते और पढ़ते रमा की आँखें नम हो जाती थीं. उसे बचपन के दिन याद आने लगे जब उसके पापा हर रात सोने से पहले उसको कहानीयां सुनाया करते थे... तब उसे लगता था कि ये कहानियां सिर्फ मन बहलाने के लिए उसे सुनाया करते थे. लेकिन उसने आज ये महसूस किया की ये कहानियां नहीं हैं बल्कि जीवन को बेहतर ढंग से जीने के तरीके थे...
उस रात रमा ने असाइनमेंट, मोबाइल, टैब और लैपटॉप सब साइड में रख दिए और पूरी डायरी एक ही रात में पढ़ डाली... उसे ऐसा लगा जैसे उसके पापा उसके सामने बैठे हों और हर शब्द मुस्कुराते हुए उसे समझा रहे हो...
डायरी से रमा बहुत प्रभावित हुई ... उसने निर्णय लिया वह किताब लिखेगी जिसमें वो अपने अनुभवों को, अपनी भावनाओं को और अपने विचारों को कहानी या कविता के रूम में प्रस्तुत करेगी... वह चाहती है कि उसकी कहानियां सबके लिए मार्गदर्शक बने जैसे उसके पापा की लिखीं कहानियां..
रमा के हाथ में एक नई कलम और कुछ सफेद कागज थे ... उसकी जिंदगी में एक नया अध्याय जो शुरू हो चुका था...