राहुल और रवि रेस्टोरेंट में बैठे थे... चाय के दो कप और साथ में दो समोसे भी रखे हुए थे... राहुल मोबाइल में खोया हुआ था...
रवि चाय के घूंट भरता हुआ बोला
"राहुल.. चाय ठंडी हो रही है"
राहुल तो मोबाइल की स्क्रीन में नजर गड़ाए लाईक्स को देख रहा था.. मायूस होकर बोला
" हां यार मालूम है... कोई नहीं... ठंडी ही पी लूंगा.. क्या करूं... इतने अच्छे पोस्ट डालता हूं फिर भी लाइक कम मिलते हैं"
राहुल अक्सर परेशान सा रहता है... सुबह उठते ही इंस्टग्राम और फेसबुक पर लग जाता है... सोचता है इतनी मेहनत से पोस्ट डालता हूँ, फोटो डालता हूं और कभी कभी कविताएँ भी लिख लेता हूं... और लाइक्स मात्र 100 के आसपास लगता है लोग मुझे नोटिस ही नहीं करते.
रवि उसकी मनोव्यथा समझ चुका था.. उसने राहुल से एक बात पूछी
“राहुल एक बात बताओ जो तुम्हे नोटिस करते हैं, क्या वो तुम्हें जानते भी हैं?”
राहुल चुपचाप से बोला
"नहीं तो"
दोनों बातें करते करते रेस्टोरेंट से बाहर निकल रहे थे... दोनों ने देखा सामने सड़क के किनारे एक छोटा सा बच्चा साइकिल चलाते चलाते गिर गया. रवि ने दौड़कर उस बच्चे को उठाया, उसके कपड़े झाड़े और उसे हंसाकर उसका ध्यान डायवर्ट किया. बच्चा खुश होकर मुस्कुराता हुआ चला गया... दूर खड़ी उसकी मां ने भी हाथ जोड़कर मौन धन्यवाद दिया.
रवि को अपने इस काम पर सुकून मिला. बिलकुल शांत, बिना किसी लालच और बिना किसी शोर के.
राहुल ने यह सब देखा… रवि को देखकर उसके मन में कुछ हलचल हुई. उसने सोचा रवि को किसी लाइक की चिंता नहीं है ... उसके हाथ में कोई मोबाइल भी नहीं फिर भी इतना खुश..
“यार.. रवि एक बात बता.. तुझे लाइक की कोई चिंता नहीं.... बिना लाइक और प्रशंसा के भी तू इतना खुश कैसे रहता है?”
रवि ने एक लंबी आह भरी और कहने लगा
“राहुल.. मुझे लाइक नहीं… मुझे पल मिलते हैं और ये पल… मैं हमेशा दिल में सेव करता हूं.. सर्वर पर नहीं”
राहुल घर आ गया उसके मन में तूफान उठ रहा था... उसको रवि की बातें याद आ रही थी.. उसने खिड़की के बाहर देखा… सूरज ढल रहा था, आसमान सिंदूरी हो रहा था,. आज उसने पहली बार बिना फोटो लिए उस नज़ारे को महसूस किया... उसके चेहरे पर मुस्कान आई… उसने देखा असली खुशी तो यही है... मन की खुशी.
उसने मोबाइल को जेब में डाला और आकाश की विशालता को महसूस करने लगा...
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