कविता : कुत्ता और आजादी


कविता : कुत्ता और आजादी

सड़क का नन्हा सा 
ये प्यार कुत्ता
ना गले में पट्टा,
ना किसी की रखवाली
ना किसी का गुलाम
जहाँ जगह मिली
वहीं उसका आशियाना....

जब टुकड़ा मिल जाए 
रोटी या बिस्किट का
तो हर दिन त्योहार,
ना मिले तो भी 
कोई शिकायत नहीं...

लोग कहते हैं
बेचारा आवारा
मैं कहता 
हर बंधन से मुक्त है 
ये नन्हा जीव प्यारा..

मुक्त है 
इसलिए जिंदा है,
कोई मार दे
फिर भी हँसता है,

ये कुत्ता नहीं, 
एक आईना है
हमारी आज़ादी का ...

🙂🙂🙂🙂🙂

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