मैं नहीं मानता होली
रूठे रहते हैं, मुझसे रंग
लोगों रखते हैं, अपने हाथों में अबीर
मैं रखता हूं, जाम, अपने हाथों में ...
बहुत बेरहम है, ये पूनम की रात
मुझ पर चाँद हंसता है
तेरी सूरत दिखती है,
हर घूँट तेरा नाम लेती है...
लोग कहते हैं
होली मिलन का त्यौहार है,
माफ़ करना,
ये मैं नहीं कहता ....
क्योंकि चांदनी फैली है
सबके आंगन में
क्यों मेरी रात बस तन्हाई है?????...
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