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पधारो म्हारे देश





पधारो म्हारे देश : 
राजस्थानी सांस्कृति की एक झलक

राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य है, जिसकी पहचान उसकी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से होती है. यह पावन भूमि वीरों, संतों, लोक कलाओं और परंपराओं की जन्मस्थली रही है. 

राजस्थान के किले, महल, बावड़ियाँ और हवेलियाँ इसकी सांस्कृतिक पहचान के सबसे मजबूत स्तंभ हैं. 

राजस्थान के प्रमुख किले और महल में चित्तौड़गढ़ का किला जो जौहर और बलिदान की परंपरा का प्रतीक है. मेहरानगढ़ का किला, जोधपुर जो विशालता और युद्धकला का अद्भुत उदाहरण है जयपुर का आमेर किला राजपूत और मुगल स्थापत्य का संगम है. जैसलमेर का किला जिसे “सोनार किला”, भी कहते है, आज भी आबाद है. उदयपुर का सिटी पैलेस, राजसी जीवनशैली का प्रतीक है. इनके अलावा बहुत से किले महल अब होटलों में परिवर्तित हो गए हैं.

राजस्थान की प्रसिद्ध बावड़ियाँ जो जल और संरचना का अद्भुत नमूना है जैसे आभानेरी स्थित चाँद बावड़ी .जयपुर स्थित पन्ना मीणा का कुंड, जयपुर के ग्रामीण अंचल में बसी भापुरा बावड़ी, नीमराणा बावड़ी और बूंदी में ढेर सारी बावड़ियां हैं. इसी तरह और भी असंख्य बावड़िया करीब हर जिलों में पाई जाती है. ये राजस्थान की जल-संरक्षण को दर्शाती हैं.

राजस्थान के लोकसंगीत और लोकनृत्य अपने आप में एक अजूबा है जो यहां के जन जीवन के हर सुख-दुख से जुड़ा है. लोकप्रिय संगीत में मुख्यतया मांगणियार दरबारी और लोकगीतों में लंगा समुदाय प्रसिद्धहैं. लोक नृत्य मे घूमर और कालबेलिया प्रसिद्धहैं. कुछ नृत्य लोक कथाओं पर आधारित हैं जैसे कच्छी घोड़ी, चरी और गवरी इत्यादि.

 राजस्थान की वेशभूषा और आभूषण में पुरुष: धोती, अंगरखा, कुर्ता और रंगीन साफा पहनता है. महिलाएँ: घाघरा, चोली और ओढ़नी पहनती हैं. आभूषण में कुंदन, मीनाकारी थेवा कला, नथ, बोरला, पायल और बाजूबंद जो यहाँ के आभूषण सामाजिक स्थिति और परंपरा को दर्शाते हैं.

हस्तकला में राजस्थान काफी आगे है. यहां की हस्तकलाएँ पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध हैं जैसे बंधेज और लहरिया (कपड़ों की रंगाई), ब्लू पॉटरी (जयपुर), संगमरमर व पत्थर पर नक्काशी, लकड़ी की नक्काशी और फर्नीचर. चित्रकला में फड़ और पिचवाई चित्रकला प्रसिद्ध है.

राजस्थानी भोजन के प्रमुख व्यंजनो में दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्ज़ी, केर-सांगरी, बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी इत्यादि प्रसिद्द हैं. मिठाइयों में घेवर, मालपुआ और चूरमा के लड्डू पसंद किए जाते हैं.

राजस्थान में मेले और त्योहार यहां की संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं जैसे यहां के प्रमुख त्योहार हैं , तीज और गणगौर जो माता पार्वती की पूजा से जुड़े हैं. कुछ अन्य प्रसिद्ध मेले हैं जिनमें पुष्कर मेला, मरु महोत्सव और डेज़र्ट फेस्टिवल जैसे कई फेस्टिवलआयोजित होते हैं.

राजस्थान की लोककथाएँ वीरता और नैतिक मूल्यों से भरी हैं जैसे पाबूजी की फड़, ढोला-मारू, मीराबाई के भजन और चारण और भाट परंपरा इत्यादि.

राजस्थान को रंगीला राजस्थान भी कहा जाता है यहां का प्रसिद्ध स्लोगन है “पधारो म्हारे देश” जो केवल वाक्य नहीं, बल्कि राजस्थान का जीवांत जीवन-दर्शन है. यहाँ अतिथि को देवता माना जाता है और सरल जीवनशैली अपनाई जाती है.

निष्कर्ष में हम कह सकते हैं कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत केवल भूतकाल की स्मृति नहीं, बल्कि आज भी लोगों के दैनिक जीवन में जीवंत रूप में दिखाई देती है. यह विरासत हमें संघर्ष, सौंदर्य, परंपरा और आत्मसम्मान का संदेश देती है और भारत की विविधता में एक अनमोल रत्न की तरह चमकती है.




बारोली मंदिर समूह

बारोली मंदिर समूह परिसर 

बारोली मंदिर समूह परिसर राजस्थान के कोटा शहर से करीब 50 किमी दूर चितौड़गढ़ जिले में रावतभाटा कस्बे में स्थित है. 

बारोली राजस्थान के सबसे पुराने मंदिर परिसरों में से एक है और यह मंदिर समूह अपनी विशिष्ट वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. यह स्थान मंदिरों का एक समूह है जहां मुख्यतया भगवान शिव के मंदिर हैं. कुछ इतिहासकारों का मत है कि ये मंदिरों का समूह 10 वीं से 11 वीं शताब्दी के हैं जब गुरूजल प्रतिहार का साम्राज्य था, उस दौरान बनाए गए हैं. 

बारोली मंदिर की खोज सर्वप्रथम कर्नल जेम्स टॉड ने 1821 ईस्वी में की थी और इस मंदिर समूह को देखकर जेम्स टॉड बहुत प्रभावित हुए थे. उनके अनुसार ये मंदिर समूह बहुत ही भव्य और इंसानी हुनर का बेहतरीन खजाना है.

बारोली मंदिर परिसर में बहुत से मंदिर है जो मुख्यतया भगवान शिव को समर्पित हैं भगवान शिव के अलावा यहां दुर्गा माता, शिव-त्रिमूर्ति, विष्णु और गणेश जी के मंदिर हैं.

बारोली मंदिर परिसर की यात्रा करने के लिए आप कभी भी आ सकते हैं लेकिन सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का होता है, जब राजस्थान में मौसम हरा भरा और सुहावना होता है. बारोली से एक किलोमीटर दूर रावतभाटा भी खूबसूरत कस्बा है जो न्यूक्लियर पावर स्टेशन के लिए प्रसिद्ध है. रावतभाटा में कई प्राकृतिक स्थान भी है जैसे चुलिया फॉल्स, पड़ाझार, राणा प्रताप सागर बांध, सैडल डैम, चेतक टावर और बहुत से मंदिर भी दर्शनीय हैं.



पत्रिका गेट, जयपुर

"पत्रिका गेट और तोरण द्वार"
जवाहर लाल नेहरू मार्ग
जयपुर, राजस्थान

पत्रिका गेट.......
जयपुर शहर का पत्रिका गेट पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. एयरपोर्ट के नजदीक स्थित पत्रिका गेट में  पर्यटक राजस्थान की संस्कृति और इतिहास की संक्षिप्त और सचित्र झलक देख सकते हैं.





तोरण द्वार............
पत्रिका गेट के ठीक पीछे ये नव निर्मित तोरण द्वार, सफेद मार्बल से तैयार किया गया है. इसकी सुंदरता के चलते इसे गेटवे ऑफ जयपुर और गेटवे ऑफ राजस्थान के नाम से पुकारा जाता है.