कविता : यादों के दीप


कविता : यादों के दीप

जब सूरज ढलता है
रंग बिखर जाते हैं,
विशाल सूने से आकाश में
और जल जाते हैं
दीप यादों के..

दिखाई देते है
कुछ चेहरे मुस्कुराते हुए,
कुछ आवाज़ें पुकारती हुई,
कुछ रास्ते फिर से बुलाते हुए
जिन पर हम कभी साथ चला करते थे...

ये वक्त है
सब कुछ बदल देता है
या बदला लेता है
ये तो खुदा ही जाने...

सोचता हूं
याद करता हूँ,
उन बीते दिनों की
तो लगता है
ये ज़िंदगी दरअसल
यादों और वादों की
एक लंबी कहानी है
जिसके कुछ पन्ने
खुशियों के,
आँसुओं के,
जुदाई के
हर पन्ने की
अलग कहानी है...

अब तो दिन ढलते ही
यादों के दीप जलता हूँ
ताकि जिंदगी की अंधेरी राहों में
यादों की रोशनी बनी रहे...

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