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शिव क्या हैं ?


शिव क्या हैं ?
“शिव” शब्द का अर्थ है ;  कल्याण, मंगल, शुभता. 
इस दृष्टि से शिव कोई देवता मात्र नहीं हैं, बल्कि अस्तित्व का परम कल्याणकारी सिद्धांत हैं. भारतीय दर्शन में शिव को परम चेतना (Pure Consciousness) माना गया है.  शिव पुराण और लिंग पुराण में शिव को सृष्टि के मूल कारण के रूप में वर्णित किया गया है. चेतना और ऊर्जा का अद्वैत मिलन ही सृष्टि है.

पुराणों के अनुसार शिव को त्रिदेवों में “संहारकर्ता” कहा गया है, परंतु यह संहार विनाश नहीं, बल्कि रूपांतरण (Transformation) है.
त्रिदेव की अवधारणा में:
ब्रह्मा – सृष्टि
विष्णु – पालन
शिव – संहार और परिवर्तन
शिव का तांडव नृत्य सृष्टि और प्रलय की लयात्मक गति का प्रतीक है.

शिव जी के प्रतीक चिन्ह है...
त्रिनेत्र → भूत, वर्तमान, भविष्य का बोध
नीलकंठ → विष धारण कर भी संतुलन रखना
जटा से बहती गंगा → ज्ञान की धारा
चंद्रमा → मन और शीतलता
डमरू → सृष्टि की आद्य ध्वनि (स्पंदन सिद्धांत)
शिवलिंग → निराकार ब्रह्म का प्रतीक

उपनिषदों में शिव को ब्रह्म का ही एक नाम माना गया है. ईशोपनिषद की भावना के अनुसार , सब कुछ उसी एक चेतना से व्याप्त है. अर्थात शिव कोई बाहरी सत्ता नहीं, बल्कि:“जो भीतर साक्षी है, वही शिव है।”

योग परंपरा में शिव को “आदियोगी” कहा जाता है अर्थात प्रथम योगी. वे ध्यान, समाधि और तंत्र के मूल प्रवर्तक माने जाते हैं.

शिव केवल एक देवता नहीं  हैं 
वे शून्य भी हैं और पूर्ण भी,
वे विनाश भी हैं और सृजन भी,
वे मौन भी हैं और नाद भी

ॐ नमः शिवाय 

कविता : शिव



शिव....

रात में 
जब चंद्रमा साधना में लीन होता है,
आकाश
मौन का वस्त्र ओढ़ लेता है
तब कहीं दूर
घंटियों की धीमी ध्वनि में
भगवान महादेव उतरते हैं
मन के एकांत आँगन में.

ना कोई आडंबर है,
ना कोई शब्दों का शोर
बस एक मंत्र,
“ॐ नमः शिवाय”
जो सांसों में घुलकर
अंतर का विष हर लेता है
बेलपत्र सा सरल हो मन,
गंगाजल सा निर्मल हो विचार
तभी समझ आता है,...

शिव मंदिरों में नहीं,
हमारी जागी हुई चेतना में 
निवास करते हैं।
उस रात को
अंधकार भी आरती बन जाता है,
और शून्य में
पूर्णता का अनुभव होता है...

ॐ नमः शिवाय 

शिव


भगवान शिव..

शिव परमात्मा हैं, शिव सर्वशक्तिमान हैं, शिव सर्वविद्यमान हैं| और ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ शिव न हों. शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्रोत हैं क्योंकि शिव ही काल महाकाल हैं

भगवान शिव को कल्याणकारी माना गया है लेकिन शिव हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं. रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए है भगवान शिव सभी को समान दृष्टि से देखते है इसलिये उन्हें देवों के देव महादेव कहा जाता है

 हिंदू धर्म में भगवान शिव को अनेक नामों से पुकारा जाता है

1. रूद्र 
2. पशुपतिनाथ 
3. अर्धनारीश्वर 
4. महादेव
5. भोलेनाथ
6. महालिंगम
7. नटराज
8. केदारनाथ इत्यादि

भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र मृत्यु को जीतने वाला महान मंत्र है

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् 
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् 

भगवान शिव सबका कल्याण करें : ॐ नमः शिवाय 




ॐ नमः शिवाय :






ॐ नमः शिवाय...

शिव अविनाशी
हरते मानव त्रास
कण्ठ नाग विराजे
खुद करते विषपान
हरते सबके कष्ट
हमारे प्यारे भोले नाथ.....

सत्य ही शिव है और शिव  ही सुंदर है,सत्यम शिवम सुंदरम..

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌ उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌
🙏🙏🙏🙏