सुनसान रातों के
रात के सन्नाटे में
तारों की बारात
और यादों की बारिश
हँसी की शहनाई,
आँसुओं की ढोलक,
कुछ पल रुठे हुए,
बाहों में सिमटे हैं
पुराने खुशबू वाले खत,
कुछ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें
अधूरे सपनों की पोटली,
वक़्त की गठरी में बंधे लम्हे
कभी बूढ़े नहीं होते
रात के सन्नाटों में
जब दिल का दरवाज़ा खुलता है
फिर से यादों की बारात
चुपचाप भीतर तक
उतर आती है.....