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My beloved wife


धुंध 
(तुम्हारी स्मृति में ढली हुई)

आज सुबह की धुंध
कुछ ज़्यादा ठहरी हुई थी,
जैसे उसे भी मेरी तरह
किसी का इंतज़ार हो.

मंजिले वही हैं
और रास्ते भी
पर एक पहचान खो बैठे हैं
पेड़ भी आज नज़रें चुराने लगे हैं
हर चीज़ धुंधली नजर आती है
सिवाय तुम्हारी यादों के.

तुम्हारी खूबसूरत हँसी
धुंध के बीच से उभर आई,
फिर मैं उसी में खो गया
मैंने तुम्हें जोर से पुकारा
मेरी आवाज़ दूर कहीं खो गई.

आज इस धुंध ने 
मुझे झकझोंर कर कहा
जो चला जाता है
वह पूरी तरह नहीं जाता,
बस छोड़ देता है हर जगह
अपनी उपस्थिति.

कभी-कभी
धुंध मुझे अच्छी लगती है,
क्योंकि इसमें 
तुम्हारा न होना भी
साफ़ नहीं दिखता.

धुंध भी छँट जाती है
सूर्य निकल आता है
मैं रोशनी से घिर जाता हूं
तुम्हारा साया लुप्त हो जाता है.

जाते-जाते ये धुंध 
कुछ तो दे जाती है
एक पल के लिए
मैं फिर से तुम्हारे साथ हो लेता हूँ.



कविताऐं

कविताऐं

एक नज़र देख लूं
उन बीते हुए लम्हो को
ए लम्हो
कुछ पल ठहरो..
🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂


आओ गीत गाएँ
आनंद लें संगीत के सात स्वरों का
संगीत तो है कृष्ण की बंसी
माँ सरस्वती का सितार
भगवान शिव जी का डमरू
आओ संगीत का आनंद लें
संगीत बिन सब सून..
🙂🙂🌞🌞🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂


तृष्णा..

आपके पास मारुति हो या बीएमडब्ल्यू -
रोड वही रहेगी.
आप इकॉनामी क्लास में सफर करे या बिज़नस में, -
आपका वक्त तो उतना ही कटेगा.
आप टाइटन पहने या रोलेक्स, -
समय वही रहेगा.
आपके पास एप्पल हो या सेमसंग - आपको कॉल लगाने वाले
लोग नहीं बदलेंगे..!
भव्य जीवन की लालसा रखने या जीने में कोई बुराई नहीं हें,
लेकिन सावधान रहे
क्योंकि जरूरते पूरी हो सकती हें,
तृष्णा ( इच्छा )नहीं..

नोट : और इसी तृष्णा को पूरी करने के लिए इंसान गलत कदम उठाने लगता है.. सादा जीवन उच्च विचार.. सुखी जीवन का आधार😊😊
साभार : फेसबुक
🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂🙂