जिंदगी : एक खुली किताब
हमारी जिंदगी एक खुली किताब है. हर सुबह एक नया पन्ना हमारे सामने खुलता है. ये पन्ने कुछ सुनहरे अक्षरों से लिखे होते हैं, जिनमें खुशियां, उपलब्धियां और प्रेम की कहानियाँ दर्ज होती हैं. लेकिन वहीं कुछ पन्नों पर धुंधले शब्द होते हैं, संघर्ष, असफलता और इंतजार के. देखा जाय तो जिंदगी में सब तरह के पन्ने होने चाहिए़ क्योंकि यही पन्ने हमारी जिंदगी की कहानी को पूर्ण बनाते हैं.
इस जिंदगी वाली किताब की सबसे रोचक बात यह है कि इसके लेखक भी हम हैं और पाठक भी हम ही हैं. हमारे निर्णय, हमारी सोच, हमारे कर्म , यही इस कहानी की स्याही हैं. अगर हम शिकायत की भाषा चुनते हैं तो पन्ने भारी हो जाते हैं; यदि हम आशा और सकारात्मकता की कलम उठाते हैं तो यही पन्ने हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं.
जिंदगी में, कभी-कभी हम पुराने पन्नों में अटक जाते हैं. बीती हुई गलतियाँ, टूटे रिश्ते, अधूरे सपने, ये सब हमें पीछे की ओर खींचते हैं. लेकिन किताब की खूबसूरती इसी में है कि हर अध्याय के बाद नया अध्याय आता है. कोई भी पन्ना अंतिम नहीं होता, जब तक हम खुद उसे अंतिम ना मान लें.
हमारे जीवन की इस खुली किताब के कुछ पन्ने हम स्वयं लिखते हैं, और कुछ परिस्थितियाँ हमारे लिए लिख देती हैं. परंतु शीर्षक और निष्कर्ष हमेशा हमारे हाथ में ही होते हैं. यदि हम धैर्य, विश्वास और कर्म को आधार बनाएं, तो यह किताब प्रेरणा की एक गाथा बन सकती है.
जिंदगी को पढ़ने से अधिक उसे समझना और महसूस करना बहुत जरूरी है. हर अनुभव एक सीख है, हर मुलाकात एक नए विचार को जन्म देती है और हर संघर्ष एक नया अध्याय लिख देती है.
आओ कलम को थामे रखते हैं, जिंदगी के पन्नों को किस्से कहानियों से रंगने के लिए....
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