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लेख : होली के रंग


होली के रंग 

होली तो हर साल आती है और आती ही रहेगी. हर होली पर कुछ बिछुड़ेंगे और कुछ नए मिलेंगे. हमारी जिंदगी में कुछ होलियाँ तारीख़ ही नहीं, एक याद बन जाती है. होली के रंग तो शरीर से उतर जाते हैं लेकिन कुछ रंग हमारी आत्मा रंगीन कर जाते हैं.

होली सिर्फ एक सामाजिक उत्सव नहीं, यह एक अवसर है ....
रूठों को मनाने का,
पुरानी शिकायतों को मिटाने का,
और उन लोगों को याद करने का जो अब साथ नहीं, पर हर रंग में मौजूद हैं

जहां तक रंगों की बात है. कुछ रंग हमे हर वक्त याद रहते हैं.....
लाल रंग शादी की याद दिलाता है,
हरा रंग हरे भरे खलियानों की याद दिलाता है.
पीला रंग आध्यात्मिक रंग है, ईश्वर से मिलाता है
और नीला.... वो आसमानी रंग है, जिसके नीचे हमने जीवन का हर क्षण बिताते हैं.

आज भी होली हमें फिर से बच्चा बना देती है, हमारी एक मुट्ठी गुलाल में छिपी होती है मासूमियत और गले मिलने में छिपी होती है माफी.

इस बार जब भी रंग लगाएँ, तो सिर्फ चेहरे पर नहीं, लोगों के दिलों पर भी लगाइए क्योंकि सच्ची होली वही होती है, जहाँ रंगों से ज्यादा आत्मीय भावनाएँ गहरी हो जाती हैं.




होली


होली और यादें...

होली तो साल में
एक बार ही रंगती है
और तुम्हारी यादें तो
मुझे हर रोज रंग जाती हैं...

चलो होली खेलते हैं..

तुम वहां 
आसमान रंगों
हम यहां 
जमीन को रंगते है
चलो होली खेलते हैं





होली



होली

होली तो रंगों का त्योहार है
इसमें फागुनी मौसम की बयार है

मिलो हर किसी से गले लगकर 
मन में पवित्रता के रंगों की बहार हो
छोटो को स्नेह से रंग लगाओ
बड़ों को आदर सत्कार से मिलो मिलाओ

ये रंग भरी होली मस्ती से भरपूर होती है
इसमें कीचड़ और फूहड़ता मत मिलाओ
पवित्र मन से खेलो और खिलाओ...