कविता : होली का उत्सव
रंगों की बौछार
उमंगों का त्यौहार
चेहरे पर हँसी का हार
गुलाल की खुशबू से
महका है घर द्वार...
लाल से अनुराग
हरे से विश्वास
पीला सपनों का संसार
नीला अम्बर से झांके
रंगों का सजा है दरबार..
रूठे मन भी
गले मिल जाते,
हार जाता है अहंकार
रंगों का खेल ही नहीं होली
ये उत्सव है जीवन का
जो बांटे प्यार ही प्यार...