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कहां हो प्रिये

कहां हो प्रिये ??

मैं यहीं हूँ 
तुम्हारे पास प्रिय 
एक जगह नहीं,
तुम्हारे भीतर फैले मौन में.

तुम्हारी सुबह की 
पहली रोशनी में,
जो तुम्हारे मन को 
रोशन करती है..

चलते चलते 
जब तुम थक जाते हो
मैं पेड़ की छांव बन जाती हूं.

रात को
आकाश देखना
मैं पूनम का चांद बन
तुम्हे देखती हूं.

मैं हर पल वहीं हूँ
जब तुम कुछ कहना चाहते हो
होंठ चुप रह जाते हैं
मैं सब समझ जाती हूं.

मैं दूर नहीं हूं
पर सामने भी नहीं
तुम्हारे दिल में रहती हूं 
तुम्हे खबर भी नहीं होती
हर कदम तुम्हे थामे रखती हूं.

प्रिय 
जब भी ढूंढोगे मुझको
अपने दिल में झांकना
मैं हमेशा वहीं रहती हूं...


मेरी मधुशाला


मैं और मेरी मधुशाला

मेरी मधुशाला 
कोई शराबखाना तो नहीं 
ना कोई कैद है
मेरे मन का वो कोना है
जहाँ मेरे भावों का
भावनाओं का आईना है.

मैं यहाँ शराब
बोतलों में नहीं भरता,
ये वो यादें हैं, जो जाम बनकर
छलकती रहती है
फिर दिल में उतर जाती हैं...

कभी,  
हँसी से छलकते थे
खुशी के जाम, उनको साथ लिए
मधुशाला सी जिंदगी में 
कई तैरते हुए 
सपनों के जाम पिए हुए..

अब कौनसा जाम उठाऊं
बुझे बुझे से शब्दों का 
कविताओ ने पी लिया है
जहर मेरे जज्बात का...

कभी मधुशाला थी जिंदगी
प्रेम था नशा
बिन शराब के 
आज विरह ने रंग दिखाया है
उन रंगीन प्यालों का.

जिसे समझा था 
अमृत मैं
वही यादों का 
नशा बन गया...

यहाँ आँसू भी नशा है
हम फिर भी पिये जाते हैं,
किसी की याद में 
जी को जलाते हैं
हम बन गये शराबी 
अब तो मधुशाला में ही 
दीप जलते हैं...

ना कोई नियम, 
ना कोई पहरा,
अब कोई नहीं पूछता 
मेरा नाम पता
सबको मालूम है
महखाना ही है 
मेरा असली पता..

दिन छोटा सा
ऊंघता रहता है
और ये लंबी रातें 
जागती रहती हैं
नशे में करती रहती हैं
इंतजार उनका...

ये मेरी मधुशाला है
यादों वादों की
इसका कोई समय नहीं होता
जब प्यास लगे 
जाम छलक ही जाता है
आँखें में या प्यालों में...

यह वो नशा नहीं है दोस्त
जिसको सब को तलब होती है
ये तो किसी की याद का 
पैमाना होता है...

एक दिन जिंदगी की 
ये बोतल भी टूट जायेगी
देह पहचान सब छूट जाएगा,
मेरी यादों की मधुशाला रहेगी
उसमें एक नाम और जुड़ जाएगा...



My beloved wife


मेरी स्वर्गीय पत्नी के नाम

इस घर की खामोशी में 
आज भी तुम 
चहकती नजर आती हो
घर के हर कोने में 
तुम्हारी ही हँसी गूंजती है...

रसोई से खुशबू, 
आँगन की धूप 
तुम्हारी वजह से ही
अच्छी लगती थी....

साथ नहीं हो, 
फिर भी साथ हो 
मेरी हर साँस में 
आबाद हो 
दुख में ढाल हो
सुख में उजाला बनकर,
आज भी मेरे करीब हो

तुम दूर चली तो गईं हो
पर छोड़ा नहीं तुमको मैने 
तुम्हे थाम के रखा है
ढेर सारी यादों में...

तुम जहां भी हो
स्वर्ग में हो या देव लोक में 
आज भी मेरी प्रार्थनाओं में हो
देह से दूर, मेरी आत्मा में हो
तुम्हीं तो मेरे जीवन की
कविता हो, भावना हो
दूर हो फिर भी करीब हो...



My beloved wife








My beloved wife 

She is not gone,
she walks beside me 
in my silent prayers
in each 
and every thought.

When I feel
nights are long,
and days are short
I find her love
all the time 
in air.

Time could not break
what we have made
But not death
and  distance,
not even fate.

You lives in me,
my heart, 
my soul,
my beloved wife
forever whole.


My beloved wife

रात और यादें...

बालकनी की रेलिंग से
रात के गहन अंधकार में 
कुछ अधूरे ख़्वाब नजर आए 

ये रात का साया 
रोशनी से नहाया ये शहर
दूर तक चमकता रहता है

आँखों में थकी रोशनी,
और खामोश हवा कहती है
सब तो ठीक है, 
बस थोड़ी सी 
आंखों में नमी है

मेरे दिल में 
गहन अंधेरा है
मेरा खोया नूर अब
कहीं तारा बन के चमकता है
मैं यादों में सिसकता हूं.

यह रात 
मेरे कान में धीरे से फुसफुसाई 
जीना भी एक कला है, 
तू बस जीने का तरीका देख





My beloved wife


चैन नहीं किताबों में....

नहीं मिलता चैन, किताबों में
जब से आई हो तुम, मीठे ख्यालों में

हर लफ़्ज़ में, बस तेरा ही असर है,
खो गया हूँ मैं तो, तेरे ख़यालों में

नींद भी अब,  रुठी हुई है 
ये रात नहीं कटती है,
उलझ जाती है, बस यादों में 
या उलझे सवालों में

आईना भी पूछता है, 
अब हाल मेरा 
जब में दिखता हूँ 
उसको टूटे ख़्वाबों में

लोग कहते हैं,  वक़्त मरहम है,
ज़ख़्म गहरे हैं तेरे , 
अब भी यादों में


My beloved wife

तुम्हारी खूबसूरत यादें और ये धुंध....

आज धुंध उतरी है 
चुपचाप मेरे शहर की राहों पर,
मैंने भी ओढ़ ली है
सपनों की चादर.

जो दिखा नहीं, 
वही पास लगा
ख़ामोशी ने आज फिर 
मुझसे बात की है..

शुभ प्रातः मित्रों 
आज का दिन मंगलमय हो 

gkkidiary.blogspot.com

My beloved wife


धुंध 
(तुम्हारी स्मृति में ढली हुई)

आज सुबह की धुंध
कुछ ज़्यादा ठहरी हुई थी,
जैसे उसे भी मेरी तरह
किसी का इंतज़ार हो.

मंजिले वही हैं
और रास्ते भी
पर एक पहचान खो बैठे हैं
पेड़ भी आज नज़रें चुराने लगे हैं
हर चीज़ धुंधली नजर आती है
सिवाय तुम्हारी यादों के.

तुम्हारी खूबसूरत हँसी
धुंध के बीच से उभर आई,
फिर मैं उसी में खो गया
मैंने तुम्हें जोर से पुकारा
मेरी आवाज़ दूर कहीं खो गई.

आज इस धुंध ने 
मुझे झकझोंर कर कहा
जो चला जाता है
वह पूरी तरह नहीं जाता,
बस छोड़ देता है हर जगह
अपनी उपस्थिति.

कभी-कभी
धुंध मुझे अच्छी लगती है,
क्योंकि इसमें 
तुम्हारा न होना भी
साफ़ नहीं दिखता.

धुंध भी छँट जाती है
सूर्य निकल आता है
मैं रोशनी से घिर जाता हूं
तुम्हारा साया लुप्त हो जाता है.

जाते-जाते ये धुंध 
कुछ तो दे जाती है
एक पल के लिए
मैं फिर से तुम्हारे साथ हो लेता हूँ.



My beloved wife


यादों के पंख....

मेरी आंखों के सामने 
उनको जला दिया गया 
वो एक आत्मीय पहचान 
अब धुएँ में बदल गई थी
और मैं इसी जमीं पर रह गया
इन भीगी हुई आंखों में 
एक गहरा सन्नाटा लिए हुए .

राख बन गया 
उनका शरीर,
मेरे भीतर अब भी
बहुत कुछ जल रहा है
जो सोने नहीं देता
उसकी आवाज़ आती है.

वो तो चली गई है
बहुत दूर इस देह से भी परे
इतनी दूर जहाँ 
मेरे शब्द नहीं पहुँचते,

अब तो यादें भी खामोश हैं
और ये खामोशी एक संवाद 
समय की राख टटोलता हुआ
मैं एक बुझा सा इंसान
और वो अनंत की गोद में 
चिर लीन विलीन.






My beloved wife


My Beloved Wife....

I still feel 
You are not gone, 
you always live in me,
In my quiet hours, 
in my memories,
In my every breath.

As you know
your laughter lingers in the air,
Your kindness follows everywhere.
Though time moves on and days grow wide and
you walk forever by my side.

I speak to you 
in my silent prayers
I feel you near
in my lonely nights.

God knows even better
that your death could not take
our love away.
Because my heart still beats, 
all the time with you.

Oh God
Take care of my wife
with love and love.

My beloved wife


कोरा काग़ज़ 

ये जीवन मेरा 
कोरा काग़ज़ सा
जो भी लिखा 
मिटता चला गया

कुछ सपने स्याही बनकर 
कागज पर उतारे थे 
कोई उन सपनों को 
उड़ा ले गया.

लिखी थी कभी 
धूप में कुछ सुनहरी पंक्तियाँ,
बारिश के धब्बों ने
सब धो दिया.

इस जिंदगी के
कोरे पन्नों की किताब का
मैं ही लेखक हूं
मैं ही पाठक हूं

क्या करूं 
गलतियाँ से सीखता हूं
फिर भी गलती करता हूं
कल भी कोरा कागज था
आज भी कोरा कागज ही हूं.






My beloved wife

My beloved wife....

I know you are far away
where I can not reach you
But you are still 
in my morning light.

You know 
I speak to you 
in my routine moments
during making tea 
Sitting on your recliner 
And watching you on TV.

I know 
One may go but
Love does not end.
It changes its address.

I can't forget 
your smiling face 
Your memories 
Your actions and activities.

Until then,
I will live as if you can see me
always trying, failing, loving
and writing poems on you.

You know 
when my time comes,
if there is a voice that knows me first,
I believe, it will be yours.