कविता : अँधेरों से शिकायत


कविता : अंधेरे से शिकायत 

मुझे शिकायत है
इन अँधेरों से 
चुपके से आते हैं 
सवालों को गहरा कर जाते है
चेहरे के रंग मिटा जाते हैं....

फिर सोचता हूं 
ये अंधेरा 
दुश्मन नहीं है,
एक मौन दर्पण है
अनगिनत सच का,
जिसमें झाँककर
इंसान खोजता है
सत्य की रोशनी......


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