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पर्यटन: एक अच्छी हॉबी


पर्यटन: एक अच्छा विकल्प

पर्यटन या यात्रा ज्ञान प्राप्ति के लिए एक शानदार हॉबी है. जरूरी नहीं कि यात्रा आपके मनपसंद जगह की हो या किसी धार्मिक स्थल की, हर तरह की यात्राएं आपको ज्ञान, सुकून और भावनात्मक अनुभव ही देंगी. जैसे कई खूबसूरत जगह देखकर या कोई धार्मिक जगह देखकर इंसान का बदल जाना.

यह भी अनुभव किया गया है. कई बार तो शहरी लोगों को पर्यटन से शान्ति का अच्छा अनुभव प्राप्त होता है जैसे पहाड़ों में मोबाइल का चुप होना आपको प्रकृति की समीपता का अहसास दिलाता है. जैसे पहाड़ सिखाते है, दृढ़ होना.  नदी के किनारे बैठकर समझ आता है, धीरे चलना और सतत चलते रहना.

पर्यटन से आपको कई अनजाने अनुभव भी होते हैं. जैसे रेल की खिड़की से दिखते हुए पहाड़, नदियां और नई नई जगहें. नए स्थानों में हम देख पाते हैं उस जगह के लोगों की जिंदगियां, उनके रहन सहन और उनकी संस्कृति.

पर्यटन का मनोविज्ञान पहलू यह भी है, जो लोग अकेले यात्रा करना चाहते हैं, उनका डर कम होता है. कुछ उनके जैसे सहयात्री भी उनका मनोबल बढ़ाते हैं. यात्रा उनको अपने आप को जानने का अवसर भी प्रदान करती है.

यात्रा या पर्यटन के दौरान क्या करें जिससे यात्रा मनोरंजक और ज्ञान देने वाली हो. आओ इस पर विचार करें...

ज्ञात रहे बजट के द्वारा कम पैसों में भी बड़ी यात्रा की जा सकती है.

यात्रा मैं आप जानकारी और ढेर सारी यादों एकत्रित कर सकते हैं.

यात्रा के दौरान आप फोटोग्राफी और स्केचिंग भी कर सकते हैं.

सीनियर सिटीजन धार्मिक यात्रा कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते है.

नई जगह की संस्कृति वहां के भोजन का आनंद ले सकते हैं

अंत में, मैं ख्वाजा मीर दर्द की प्रसिद्ध शायरी का उल्लेख करना चाहूंगा. उन्होंने लिखा था.
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल, 
ज़िंदगानी फिर कहाँ 
ज़िंदगानी गर रही तो, 
ये जवानी फिर कहाँ.



शीतला माता मंदिर



शीतला माता मंदिर, 
चाकसू (राजस्थान) 

प्रसिद्ध शीतला माता जी का मंदिर राजस्थान के जयपुर जिले के चाकसू कस्बे में शील डूंगरी (Sheel ki Dungri) नामक पहाड़ी पर स्थित है.  यह जयपुर शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर, टोंक रोड पर स्थित है.


शीतला माता जी का मंदिर एक प्रसिद्ध हिन्दू देवी स्थान है. शीतला माता जी, जो चेचक, खसरा और अन्य महामारी-संबंधित रोगों से रक्षा करने वाली देवी हैं.

पर्यटन की दृष्टि से भी यह जगह बहुत मशहूर है. मंदिर एक पहाड़ी टॉप पर स्थित है जहाँ से सुंदर प्राकृतिक दृश्य, झील और अन्य पहाड़ियां भी दिखाई देती हैं. श्रद्धालु मंदिर सीढ़ियों से या पहाड़ काटकर बनाए रस्ते से जाते हैं.  

एक बार यहाँ सीढ़ियों पर "करण अर्जुन" नाम की फिल्म भी शूट की गई थी.

माता मंदिर 500 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है और स्थानीय लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है, यहां साल में एक बार शीतला अष्टमी को मेले का भी आयोजन होता हैं मेले में दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं, माता को ठंडे पकवानों का भोग अर्पित करते हैं और पूरे दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है. 

कहते हैं माता शीतला को प्रसाद अर्पण करने से या प्रसाद खाने से चेचक और अन्य बीमारियों से रक्षा मिलती है.  यहां भक्तों की अन्य मनोकामनाएँ भी पूरी होती हैं. 

यह मंदिर सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है, रुकने के लिए बहुत सी धर्मशालाएं उपलब्ध हैं जहां रुका जा सकता है.

जगदीश जी का मंदिर गोनेर जयपुर

श्री लक्ष्मी जगदीश मंदिर, 
गोनेर, जयपुर

जयपुर शहर से करीब 20 KM दूर गोनेर में स्थित है श्री लक्ष्मी-जगदीश महाराज जी का करीब 500 वर्ष पुराना मंदिर .. ऐसा कहा जाता है कि इस गांव के किसान के सामने लक्ष्मी-जगदीश भगवान साक्षात प्रकट हुए और जमीन में दबी अपनी मूर्तियों को को बाहर निकालकर विधिपूर्वक स्थापित करने का आदेश भी दिया था...  

एकादशी के दिन यहां भक्तों का मेला लगा रहता है.. यहां मालपुए, दाल और मिर्ची की सब्जी जिसे टपोरे कहते हैं, लाजबाब होते हैं..

कहा जाता है कि मुगल शासन के दौरान इस मंदिर को बहुत नुकसान पहुंचाया गया था ...जयपुर राजघराने तथा अन्य भक्तों के सहयोग से मन्दिर का पुनः निर्माण कराया गया.. मंदिर का प्रवेश द्वार और मुख्य मंडप संगमरमर से बना हुआ है ..

मंदिर के पास ही एक तालाब है और एक पुरानी बावड़ी भी है.. गोनेर ग्राम में राजा महाराजाओं द्वारा निर्मित एक पुरानी  हवेली भी है जिसमे आजकल राजकीय शिक्षक प्रक्षिक्षण संस्थान  चलता है..

पर्यटक जो चोखी ढाणी जाते हैं और यह मंदिर भी देखना चाहें  तो हैं गोनेर ; चोखी ढाणी से करीब 8 KM दूर होगा.. हां शुद्ध ग्रामीण परिवेश का आनंद मिलेगा आपको यहां...


मंदिर का प्रवेश द्वार


पुराने किले में स्थित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान


पुरानी बावड़ी


तालाब 

😊😊☺️☺️

दिल्ली





जून  2023
हौज खास डियर पार्क, नई दिल्ली

दिल्ली में बहुत से खूबसूरत पार्क हैं कुछ नए बनाए गए हैं तो कुछ बहुत पुराने भी हैं. ऐसा ही एक पार्क है जो आईआईटी दिल्ली के पास और हौज खास मेट्रो स्टेशन के नजदीक है जहां आप निशुल्क प्रवेश कर सकते है.   

हौज खास डियर पार्क भी बहुत पुराना है लेकिन आज भी हरियाली से भरपूर और सुकून दायक है. करीब 60 एकड़ में फैला ये पार्क दिल्ली की भीड़ भरी जिंदगी में प्रकृति की समीपता का अनुभव कराता है इसी पार्क के अंदर एक झील भी है जिसे हौज खास झील कहते हैं, जिसका निर्माण खिलजी वंश के अलाउद्दीन खिलजी ने 1295 ई. में करवाया था इसके निर्माण का उद्देश्य आस पास के गांवों में पानी उपलब्ध कराना था. 

हौज खास डियर पार्क के अंदर हिरणों के स्वछंद विचरण के लिए एक बहुत बड़ा कवर्ड एरिया बनाया गया है जहां आप विभिन्न प्रजातियों के हिरणों को खेलते, कूदते और शोर मचाने हुए देख सकते हो. यहां की एक खास बात ये भी है की यहां झील के पास ही बड़े बड़े पेड़ों पर हजारों उल्टे लटके हुए और शोर मचाते हुए चमगादड़ भी दिखाई देते हैं और इतना ही नहीं इस झील में आप स्वछंद तैरती हुई ढेर सारी बतखें भी देख सकते हो. दिल्ली सरकार ने यहां एक ओपन जिम भी बनाया हुआ है और बैठने के लिए सुंदर मचान भी बनाये हैं

हौज खास पार्क के आस पास अलग अलग हिस्सों में आप रोज गार्डन, फाडंटेन और डिस्ट्रिक पार्क कुछ एतिहासिक ईमारतें और पास ही हौज ख्रास कला बाजार, रेस्टोरेंट और शॉपिंग का भी आनंद ले सकते हो.

डियर पार्क के पास ही हौज खास गांव के अंदर सरकार द्वारा संरक्षित मुगलकालीन शैली में बने मकबरों और उनपर उकेरी गई मुगल शैली कला को भी अनुभव कर सकते हैं, यहां से हौज खास झील बहुत ही सुंदर नज़र आती है. 
उम्मीद है यह पार्क आप को इतिहास के साथ साथ प्रकृति का आनंद भी अनुभव कराएगा...

झील में बतखें


स्वछंद विचरण करते हिरण


सरकार द्वारा स्थापित जिम 


हौज खास झील



राजस्थान दिवस

30 मार्च 2023
राजस्थान दिवस

राजस्थान का स्थापना दिवस हर वर्ष 30 मार्च को ही मनाया जाता है. आज हमारा राजस्थान 74 साल का हो गया है. आज ही के दिन राजस्थान की कई रियासतों का एकीकरण किया गया था. 

राजस्थान...

सोना री धरती जचे
चांदी रो आसमान
ऊंटा रो प्रदेश म्हारो
महाराणा प्रताप री शान
खेजड़ी रा पेड़ सजे
महलां री खान
रंग रंगीलो म्हारो राजस्थान..


शील की डूंगरी

शील डूंगरी : चाकसू (जयपुर) 

राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर के दक्षिण में करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर चाकसू कस्बे में शीतला माता का मंदिर है जो की एक अकेली पहाड़ी पर बसा हुआ है जिसे शील की डूंगरी कहते हैं. शील की डूंगरी दूर से ही नजर आ जाती है. मंदिर पर जाने के लिए सड़क और सीढ़ियों से जाया जा सकता है, थोड़ा चढ़ाई जरूर है, लेकिन सड़क मार्ग से पैदल चलना बहुत ही सुखद लगता है. मंदिर के आस पास काफी धर्मशालाएं भी हैं. 

वैसे तो शीतला माता के मंदिर में सालभर भक्त दर्शन के लिए आते रहते हैं लेकिन, चैत्र माह में शीतला अष्टमी के दिन जिसको स्थानीय भाषा में बास्योड़ा कहते हैं के मौके पर यहां दो दिवसीय लक्खी मेला भरता है. इस दिन माता के दरबार में ठंडे पकवानों का भोग लगाया जाता है. भक्तगण आमतौर पर पुएं, पकौड़ीयां, राबड़ी इत्यादि अपने घर से बनाकर लाते है और यहां माता को भोग लगाने के बाद ही उसे खाते है. आरोग्य और सुख की कामना लिए दूर-दूर से भक्त ने माता के समक्ष धन का भी दान करते है

पर्यटन की दृष्टि से भी भी शील डूंगरी बहुत सुंदर जगह है. सड़क द्वारा चढ़ाई के दौरान मेढकनुमा चट्टाने बहुत आकर्षित करती हैं. मंदिर से चारों तरफ सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं जिनमे चाकसू गांव, वन क्षेत्र और दूर एक विशाल झील भी दिखाई देती है 

शीतला माता की भव्य मूर्ती....

मंदिर का प्रांगण...

मेढ़कनुमा चट्टान.....

मंदिर से दिखते सुंदर दृश्य....

मंदिर से दिखता झील का नजारा...






शिव की डूंगरी, चाकसू

शिव डूंगरी : चाकसू (जयपुर) 

जयपुर शहर से लगभग 70 किलोमीटर दूर चाकसू में एक अकेली ऊंची पहाड़ी ; शिव डूंगरी नामक स्थल पर भगवान शिव और गोरखनाथ जी का मंदिर है.

शिव मंदिर की ऊंची पहाड़ी पर करीब 500 सीढ़ियां चढ़ कर जाना पड़ता है कहा जाता है की यह मंदिर 2500 साल पुराना है यहां स्थित शिवलिंग विशेष पत्थर से बना हुआ है. इस जगह को गुरु गोरखनाथ जी का भी निवास स्थान भी माना जाता है यहीं एक धूना भी है जो प्राचीन काल से बना हुआ है. यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है और श्रद्धालु बहुत दूर से दर्शन को आते है.

पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान बहुत सुंदर है, यहां से आपको चारों तरफ सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं जिनमे वन क्षेत्र और एक विशाल झील भी दिखाई देती है.

शिव की डूंगरी जाने के लिए सीडियां .....


शिव मंदिर में विशाल शिवलिंग.....


शिव मंदिर के सामने धूनी और गोरख नाथ जी का मंदिर..
मंदिर की पहाड़ी से दिखाई देते है, ये सुंदर दृश्य.....


जगदीश जी मंदिर, गोनेर जयपुर

श्री जगदीश जी का मंदिर
ग्राम : गोनेर (जयपुर)

जयपुर शहर से करीब 20 KM दूर प्रताप नगर के नजदीक ग्राम गोनेर में श्री जगदीश जी महाराज का अति प्राचीन और सिद्ध मंदिर है जो ग्रामीण जनों के बीच तो बहुत ही प्रसिद्ध है. लोगो का मानना है की यह मंदिर ५०० साल से भी ज्यादा पुराना बना हुआ है और इस मंदिर की पूजा सदियों से चलती आ रही है. यहां एक पुराना फोर्ट भी है जिसमे एक जमाने में राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान चलता था..

किवदंती है की श्री जगदीश महाराज की मूर्ति अपने आप जमींन से प्रकट हुई है और फिर बाद मैं इस मूर्ति को विधि विधान के साथ मंदिर मैं स्थापित किया गया था जिसमें जयपुर राजघराने ने भी सहायता की थी..... जगदीश जी के भक्तों में इस मन्दिर की बहुत मान्यता है, यहां श्रद्धालु जो भी मांगता है उसकी इच्छा पूरी हो जाती है. एकादशी को यहां बहुत भीड़ होती है.

मंदिर के पास ही एक तालाब है को बारिश में भरा होता है, एक छोटा सा ग्रामीण मार्केट भी है जहां प्रसाद से सजी दुकानें हैं, परचूनी, चूड़ियों की दुकानें हैं, कृषि संबंधी औजारों की दुकानें यानी आस पास के ग्रामीण लोगों के लिए सभी जरूरी सामान यहां उपलब्ध है. 

एक खास बात है की यहां जिसकी मांग यानी मन्नत पूरी जो जाती है वह भगवान को भोग में मालपुआ, दाल और मिर्च के टपोरे और खीर का भोग लगाकर अपने संबंधीयों और मित्रों को खिलाते है . ये वास्तव में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं. यहां इनको बनाने वालों की बहुत सी दुकानें है, आप इनको खरीद कर घर भी ले जा सकते हैं.

यदि आप ग्रामीण जीवन की झलक, ग्रामीण जीवन, पहाड़ का और प्रभु के दर्शन का आनंद चाहते हैं तो जयपुर से इस ग्रामीण मंदिर में जरूर आएं, हां ये चोखी ढाणी और टोंक रोड से करीब 7 KM होगा. जयपुर शहर से लोकल सिटी बस भी आती है. 

ॐ विष्णवे नमः 





 

सिटी पार्क जयपुर



सिटी पार्क, मानसारोवर जयपुर

सिटी पार्क, मानसरोवर जयपुर,  जयपुर की शान में एक और नया बेहतरीन पार्क जिसको विदेशी तर्ज पर बनाया गया है.. प्राकृतिक रूप से इसे बहुत सुन्दर तरीके से सजाया भी गया है..

राजस्थान का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज इसी पार्क में लगाया गया है तथा इस पार्क में जोगिंग ट्रैक के अलावा सेल्फी प्वाइंट, स्कल्पचर आर्ट, झरने, फूलों के बगीचे और सुंदर लैंडस्केप का भी बखूबी ध्यान रखा गया है.. अगर आपके पास समय की कमी है तो 100 रुपए प्रति व्यक्ति आप रथनुमा  बैटरी चालित वाहन में बैठकर पार्क का पूरा राउंड ले सकते हो.. सच में यह पार्क स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों के लिए भी एक बेहतरीन जगह बन चुका है..

शाम को रोशनी में नहाया ये पार्क किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता... 



जयपुर चौपाटी मानसरोवर जयपुर

जयपुर चौपाटी : मानसरोवर जयपुर

जयपुर चौपाटी, अग्रवाल फार्म  के निकट द्वारका दास पार्क के पास मानसरोवर जयपुर में स्थित है. यहां आप पारंपरिक दाल बाटी चूरमा से लेकर अन्य तरह के स्ट्रीट फूड के साथ-साथ देश विदेश के विभिन्न व्यंजनो का भी आनंद ले सकते हैं.

मेरे विचार से खाने के शौकीन लोगों के लिए मसाला चौक रामनिवास बाग, जयपुर के बाद ये दूसरी नई सुंदर और अच्छे हरे भरे वातावरण वाली जगह है.. यहां खाने की प्रति व्यक्ति औसत कीमत 100 रुपए से लेकर अधिकतम 200 रुपए तक आती है जो की जेब के लिए भी ठीक है.. 

जयपुर चौपाटी मे शाम को खाने के साथ साथ यहां लाइव बैंड का भी आनन्द लिया जा सकता है, पार्किंग की व्यवस्था भी अच्छी है.. छुट्टी के दिनों में यहां काफी भीड़ रहती है लेकिन अन्य दिनों में यहां आराम से खाने का और एम्बिएंस का भरपूर आनन्द लिया जा सकता है.. 

जयपुर चौपाटी का समय सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक है और प्रवेश शुल्क 10 रुपए प्रति व्यक्ति है और पार्किंग निशुल्क है.








पुष्कर



पुष्कर झील और सावित्री मंदिर 
पवित्र पुष्कर झील, अजमेर से लगभग 10-12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह पवित्र् झील, राजस्थान ही नहीं भारत के लोगो के लिए पसंदीदा और अध्यात्मिक जगह है.  पुष्कर छोटी छोटी पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहाँ ब्रह्मा जी का एक प्राचीन मंदिर है कहा जाता है की  भगवान ब्रह्मा जी का यह प्राचीन मंदिर पूरी दुनिया में एक ही है. पुष्कर हिंदुओं का परम तीर्थ है जहाँ मृत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है .
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, पवित्र पुष्कर झील को “तीर्थ राज” के रूप में जाना जाता है, कहा जाता है की कोई भी तीर्थ पवित्र पुष्कर झील में स्नान के बिना पूरा नहीं होता. पुष्कर में करीब 50 और 400 से अधिक मंदिर हैं.  झील के चारों और घाट और मंदिर बहुत ही सुन्दर लगते हैं. यही कारण है कि सदियों से धर्मावलम्बी, लेखक, कलाकार अपनी-अपनी कलाओं को निखारने के लिए पुष्कर आते जाते रहते हैं . ब्रह्मा मंदिर के अलावा यहाँ बालाजी मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, मन मंदिर, वराह मंदिर, आत्मेश्वर महादेव मंदिर आदि भी श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं.  


मुझे पुष्कर नगरी हमेशा से चुम्बक की तरह खींचती है सच में इस शहर में एक जादू है. अक्टूबर / नवम्बर माह में वार्षिक मेले के दौरान यह नगरी देशी विदेशी लोगों से भर जाती है.


बारिश के दिनों में पुष्कर झील का : गऊ घाट से लिया गया चित्र 


मनोरम घाटों और सरोवर का सुन्दर दृश्य 

पुष्कर सरोवर के घाटों पर स्नान करते हुए श्रद्धालु


अजमेर से जब पुष्कर जाते हैं तो रस्ते में प्रताप स्मारक जरूर देखें यहाँ से अजमेर के सुन्दर द्रश्य नजर आते हैं . आप आना सागर झील भी देख सकते हैं . पहाड़ी मार्ग पर स्थित यह जगह बहुत सी सुन्दर है . 





सावित्री मंदिर


भगवान ब्रह्मा जी की प्रथम पत्नी, सावित्री देवी जी, को समर्पित यह मंदिर ब्रह्मा मंदिर के पीछे एक पहाड़ी में स्थित है। मंदिर तक पहुँचने के लिए कई सीढियाँ चढनी होती हैं वैसे पर्यटकों की सुविधा के लिए सरकार ने यहाँ रोप वे की सुविधा भी दी है .  सावित्री मंदिर प्रांगण से पुष्कर सरोवर और आसपास के गाँवों का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है। खासकर बारिश के दिनों में पुष्कर हरा भरा हो जाता है जिससे और भी सुन्दर हो जाता है 



सावित्री माता के मंदिर से पुष्कर का विहंगम दृश्य . पुष्कर सरोवर यहाँ से साफ़ दिखाई दे रहा है . 


सावित्री माता मंदिर जहाँ आप बंदरों की अठखेलींया  देख सकते हैं . आपको इनसे सावधान भी रहना है ये खाने की चीजों के बहुत शौक़ीन हैं . 

पुष्कर में आप रेगिस्तान का आनंद भी ले सकते हैं . आपका ब्लॉगर मित्र एक बंजारा गायक के साथ 

पुष्कर की शान है ऊंट ; आप यहाँ के रेगिस्तानी जगहों की  सैर ऊंट की सवारी के साथ जरूर करें . आपको रेगिस्तान् की सैर का आनंद आ जाएगा.  आप यहाँ पर्यटकों  को " केमल सफारी" का आनंद लेते हुए और फोटोग्राफी करते हुए भी देख सकते हैं . 

पुष्कर के रेगिस्तान की एक झलक और दूर दिखाई देते हुए बंजारों के घर .






सामोद और मालेश्वर महादेव

वीर हनुमान जी - समोद

सामोद  जयपुर से करीब ४०-५० किलोमेर और चोमू स्टेशन से करीब ५-६ किलोमीटर की दूरी पर है . यह जगह चोमू तहसील के ग्राम नांगल भरडा के सामोद पर्वत पर स्थित है. यह मंदिर राजस्थान के सबसे धार्मिक स्थलो में से एक है जो पहाड़ी पर बना है. करीब ११०० सीडिया चढ़कर श्री हनुमान जी के मंदिर पहुँचा जा सकता है.. 
मंदिर में हनुमान जी की करीब  6 फीट की विशाल प्रतिमा स्थापित है. यह बहुत ही सुन्दर जगह है जहाँ पर्वत से मनोरम दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है.. राजस्थान सरकार यहाँ रोपवे का निर्माण कर रही है जिससे उन यात्रियों  को सुविधा हो जायेगी जो सीढियों चढ़ने में असमर्थ हैं.
सामोद  में वैसे तो कई और जगह हैं जैसे सामोद  महल जो अब होटल में परिवर्तित हो गया है. सामोद  से करीब 10-१५ किलोमीटर की दूरी पर मालेश्वर महादेव का मंदिर है जो पहाड़ियों की गोद में बसा है भगवन शिव की यह जगह बहुत ही सुन्दर है बारिश के दिनों में सामोद  और मालेश्वर महादेव का मंदिर बहुत ही सुन्दर और हराभरा हो जाता है. 
सामोद मंदिर का प्रवेश द्वार 

सीढियाँ चढ़ते यात्री 

करीब ११०० सीढियाँ चढ़ कर मंदिर पहुंचना होता है तब जाकर प्रभु के दर्शन होते हैं. 

मंदिर परिसर से प्राकर्तिक सोंदर्य के दर्शन 

रसोई में भंडारे और थाल का तैयार किया जाना. जिन लोगों की मुराद पूरी हो जाती है वो यहाँ थाल करके प्रभु को धन्यवाद अर्पित करते हैं .




मालेश्वर महादेव तहसील चोमू  


पहाड़ी की गोद में बसा मालेश्वर महादेव का मंदिर . एक और नदी बहती हुई दिखाई दे रही है 

मालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में एक प्राचीन किला जो राजशाही की याद दिलाता है. 

मालेश्वर मंदिर परिसर में प्रसाद बनाने और खाने की जगह . विशाल पर्वतों के गोद में बसा मालेश्वर महादेव मंदिर बहुत ही सुन्दर जगह है.

मालेश्वर शिव मंदिर में दर्शन से पहले  स्नान करते हुए श्रद्धालू .