कहानी : जैसे को तैसा

कहानी : जैसे को तैसा

राजधानी की एक पॉश कॉलोनी. इसी कॉलोनी में रहते हैं विनय बाबू, एक रिटायर्ड टीचर जिनकी पत्नी का देहांत अभी कुछ माह पहले हो चुका था और बच्चे सभी विदेश रहते हैं... मित्रता पूर्ण व्यवहार शांत स्वभाव, सुबह टहलना, किताबें पढ़ना, पौधों को पानी देना और कभी-कभी मोबाइल पर कविता और कहानी लिखना उनका शौक था.

उनके पड़ोस में एक नालायक लड़का रहता था, नाम था तारा सिंह जो आवारा किस्म का लड़का था. उसके शौक थे... देर रात जोर जोर से लाउड म्यूज़िक बजाना, दारू पार्टियाँ और सोशल मीडिया के लिये रील्स बनाना. और हां सुबह देर तक सोना.

अड़ोसी पड़ोसी बहुत दुखी थे. यही सोचकर चुप हो जाते थे गुंडे के मुंह कौन लगे अगर उल्टा पड़ गया तो, सुना था उसका बाप क्रिमिनल लॉयर है..

लेकिन एक दिन तो हद हो गई। वह रात एक बजे बालकनी में खड़ा तेज़ म्यूजिक के साथ भद्दे गाने गा रहा था. विनय जी को नींद नहीं आ रही थी... वे उठे... तारा सिंग का घर खटखटाया 

“धम… धम… धम…”
तारा सिंह ने दरवाजा खोला और चिल्लाया
"कौन है बे"
 विनय जी को देखते हुए थोड़ा नरम होकर बोला
"जी अंकल"

विनय जी प्यार से बोले 
“बेटा, थोड़ा आवाज़ कम कर लो… मुझे नींद नहीं आ रही है”

तारा सिंह कुटिल मुस्कान मारते हुए बोला
“अंकल, रिलैक्स… ये तो अपुन का लाइफस्टाइल है, आपने भी तो अपने जमाने में धूम मचाई होगी” यह कहते हुए उसने झट से दरवाजा बंद कर दिया.

विनय जी को गुस्सा आया लेकिन पी गए... उन्होंने ठान लिया था ... वो तारा सिंग को सबक जरूर सिखाएंगे..

अगले दिन ही सुबह 4 बजे विनय जी ने भी अपना नया “लाइफस्टाइल” दिखाना शुरू कर दिया... मोबाइल स्पीकर पर भजन और मंत्र पूरे वॉल्यूम पर चला दिए.

"हरे रामा, हरे रामा.. रामा रामा हरे हरे"
“ॐ शांति… शांति… शांति…” 
"गायत्री मंत्र"
चारों ओर गूंजने लगी 

तारा सिंह माथा पीटते हुए उठा.. उसकी आँखें लाल और बाल बिखरे हुए थे...
वह भागकर विनय जी के घरआया 
“अंकल जी.. ये क्या है सुबह-सुबह?... आपने तो मेरी नींद ही खराब कर दी”

विनय जी मुस्कुराए औरबोले
“बेटा… ये भी अपुन का लाइफस्टाइल है।” 
"अंकल प्लीज़ बंद कर दो ना... अब में आगे आपकी बातों को ध्यान में रखूंगा" 
हाथ जोड़ते हुआ तारा बोले जा रहा था
विनय जी ने कहा 
"ठीक है अगर फिर से ये सब होगा तो अपुन भी अपनी लाइफ स्टाइल दिखा देंगा... समझे बच्चू"

उस दिन के बाद मोहल्ले वालों ने चैन की साँस ली .... किसी ने एक दिन विनय जी से पूछा 
"ये अब कैसे शांत हो गया...?"
विनय जी हंसते हुए बोले 
"कभी-कभी नालायक पड़ोसी को समझाने के लिए थोड़ा स्मार्ट पड़ोसी बनना पड़ता है, श्री मान जी”


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