नहीं मिलता चैन, किताबों में
जब से आई हो तुम, मीठे ख्यालों में
हर लफ़्ज़ में, बस तेरा ही असर है,
खो गया हूँ मैं तो, तेरे ख़यालों में
नींद भी अब, रुठी हुई है
ये रात नहीं कटती है,
उलझ जाती है, बस यादों में
या उलझे सवालों में
आईना भी पूछता है,
अब हाल मेरा
जब में दिखता हूँ
उसको टूटे ख़्वाबों में
लोग कहते हैं, वक़्त मरहम है,
ज़ख़्म गहरे हैं तेरे ,
अब भी यादों में
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