मैं यहीं हूँ
तुम्हारे पास प्रिय
एक जगह नहीं,
तुम्हारे भीतर फैले मौन में.
तुम्हारी सुबह की
पहली रोशनी में,
जो तुम्हारे मन को
रोशन करती है..
चलते चलते
जब तुम थक जाते हो
मैं पेड़ की छांव बन जाती हूं.
रात को
आकाश देखना
मैं पूनम का चांद बन
तुम्हे देखती हूं.
मैं हर पल वहीं हूँ
जब तुम कुछ कहना चाहते हो
होंठ चुप रह जाते हैं
मैं सब समझ जाती हूं.
मैं दूर नहीं हूं
पर सामने भी नहीं
तुम्हारे दिल में रहती हूं
तुम्हे खबर भी नहीं होती
हर कदम तुम्हे थामे रखती हूं.
प्रिय
जब भी ढूंढोगे मुझको
अपने दिल में झांकना
मैं हमेशा वहीं रहती हूं...
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