इस घर की खामोशी में
आज भी तुम
चहकती नजर आती हो
घर के हर कोने में
तुम्हारी ही हँसी गूंजती है...
रसोई से खुशबू,
आँगन की धूप
तुम्हारी वजह से ही
अच्छी लगती थी....
साथ नहीं हो,
फिर भी साथ हो
मेरी हर साँस में
आबाद हो
दुख में ढाल हो
सुख में उजाला बनकर,
आज भी मेरे करीब हो
तुम दूर चली तो गईं हो
पर छोड़ा नहीं तुमको मैने
तुम्हे थाम के रखा है
ढेर सारी यादों में...
तुम जहां भी हो
स्वर्ग में हो या देव लोक में
आज भी मेरी प्रार्थनाओं में हो
देह से दूर, मेरी आत्मा में हो
तुम्हीं तो मेरे जीवन की
कविता हो, भावना हो
दूर हो फिर भी करीब हो...
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