My beloved wife


यादों के पंख....

मेरी आंखों के सामने 
उनको जला दिया गया 
वो एक आत्मीय पहचान 
अब धुएँ में बदल गई थी
और मैं इसी जमीं पर रह गया
इन भीगी हुई आंखों में 
एक गहरा सन्नाटा लिए हुए .

राख बन गया 
उनका शरीर,
मेरे भीतर अब भी
बहुत कुछ जल रहा है
जो सोने नहीं देता
उसकी आवाज़ आती है.

वो तो चली गई है
बहुत दूर इस देह से भी परे
इतनी दूर जहाँ 
मेरे शब्द नहीं पहुँचते,

अब तो यादें भी खामोश हैं
और ये खामोशी एक संवाद 
समय की राख टटोलता हुआ
मैं एक बुझा सा इंसान
और वो अनंत की गोद में 
चिर लीन विलीन.






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