मेरा चांद मुझे लौटा दो


मेरा चाँद मुझे लौटा दो

काली स्याह रातों में 
कोई सपनों-सा उतर आया है
मेरे बालकनी की खामोशी में
कोई उजाला भरने आया है...

वही हँसी, 
वही नज़र, 
वही सुकून
उसकी दुआओं का साक्षी 
आज भी चमकता है
वो करवा चौथ का चांद....

सोचता हूं 
किसने छीना होगा 
मेरा पूनम का चमकता चाँद
कोई मेरे हिस्स का 
वो चांद मुझे लौटा दो....


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