“हैलो… बेटा कैसे हो ?”
मां की आवाज में कंपन था
“सुन रहा हूं, जल्दी बोलो मम्मा. मैं अभी मीटिंग में हूं बाद में कॉल करता हूं"
हिमांशु फुसफुसाते हुए बोला
“कुछ नहीं बेटा… बस यूँ ही।”
उसकी मां की आवाज में बेबसी थी
“चलो मम्मा बाद में बात करता हूँ।”
हिमांशु ने तुरंत फोन काट दिया
कुछ घंटे ही बीते थे कि अस्पताल से फोन आया
“आपकी माँ…”
ऑफिस का काम छोड़ हिमांशु दौड़ता हुआ हॉस्पिटल पहुँचा, देखा माँ बेड पर आँखें मूंदे लेटी हुई थी
नर्स ने हिमांशु के हाथ में मोबाइल पकड़ाया और बोली
“आपकी माता जी ने बस इतना ही कहा
"इसे मेरे बेटे को दे देना”
हिमांशु ने फोन खोला, स्क्रीन पर आख़िरी कॉल चमक रही थी
"Duration : 11 seconds"
हिमांशु को याद आया अभी कुछ समय पहले ही उसकी माँ ने कहा था,
"कुछ नहीं… बस यूँ ही"
जैसे वो कहना चाह रही हो
“बेटा अब ज़्यादा समय नहीं है”
हिमांशु ने सिसकते हुए फोन को सीने से लगाया. उसको समझ आ गया था कभी कभी ‘बस यूँ ही’ कॉल अलविदा की भी हो सकती है..
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