शिव....
रात में
जब चंद्रमा साधना में लीन होता है,
आकाश
मौन का वस्त्र ओढ़ लेता है
तब कहीं दूर
घंटियों की धीमी ध्वनि में
भगवान महादेव उतरते हैं
मन के एकांत आँगन में.
ना कोई आडंबर है,
ना कोई शब्दों का शोर
बस एक मंत्र,
“ॐ नमः शिवाय”
जो सांसों में घुलकर
अंतर का विष हर लेता है
बेलपत्र सा सरल हो मन,
गंगाजल सा निर्मल हो विचार
तभी समझ आता है,...
शिव मंदिरों में नहीं,
हमारी जागी हुई चेतना में
निवास करते हैं।
उस रात को
अंधकार भी आरती बन जाता है,
और शून्य में
पूर्णता का अनुभव होता है...
ॐ नमः शिवाय
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