कविता: प्रकृति


कविता : प्रकृति 

कितना सुकून है
इस प्रकृति की गोद में 

हवा का झोंका कहता है
जिंदगी कितनी सुंदर है...

चलते रहो 
नदियाँ सिखाती हैं 

पहाड़ सिखाते हैं 
स्थिर रहो 

सीमाओं में उड़ना सीखो
आसमान सिखाता है....

पेड़ खामोश से खड़े रहते हैं,
उनकी खामोशी के तले 
कितनी कहानियाँ बनती हैं...

मन व्यथित हो
तन थक जाए 
प्रकृति को निहारना
असली सुकून यहीं है...

चलते चलते
सूरज भी कहता है
रात के बाद सुबह जरूरआती है,...

जीके कहता है
यही प्रकृति की कहानी हैं...


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