बैरी चांद


चाँद मेरा बैरी ...

ये चाँद 
बैरी है मेरा
तुमको छुपा ले गया
अपनी चांदनी में 
मेरे मन की रोशनी को
सजा ले गया 
अपने आकाश में .....

मैं छत पर खड़ा हूँ
बार बार पूछता हूँ 
इस पूनम के चांद से
क्यों छीना तुमने 
मेरा सांझ सवेरा
वो मुस्कुराता है
चुप हो जाता है,
जैसे मेरे दर्द की
इसको परवाह नहीं.....

हर पूनम की रात
अब तीर सी लगती है,
उजली किरणें भी जलाती हैं
चांद सी चमकती है
तेरे माथे की बिंदी
आँखों में यादें भर जाती हैं.....

ओ बैरी पूनम के चांद
मेरी चांदनी लौटा दे
या फिर मुझे बुला ले...

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