कहानी: निंदिया और बिंदिया

कहानी: निंदिया में बिंदिया 

गजेंद्र अपने बेड रूम में लेटा अपनी पत्नी प्रिया की फोटो को निहार रहा था. मुस्कुराती हुई प्रिया के माथे पर लाल लाल गोल बिंदी बहुत प्यारी लग रही थी. गजेंद्र अक्सर गुनगुनाया करता था
"आय हाय तेरी बिंदिया रे"
और वो कहती थी 
"तेरी निंदिया ले लेगी मेरी बिंदिया रे"
सच में जब से वो गई है, गजेंद्र की निंदिया में बिंदिया छाई रहती है"

उसे याद आया प्रिया को तो बिंदी बहुत पसंद थी, चाहे शादी फंक्शन हो या पीहर जाना हो उसके मेक अप बॉक्स में तरह तरह की मैचिंग बिंदिया जरूर होती थीं. कई बार तो हॉस्पिटल भर्ती होने से पहले अपने समान में बिंदी रखना नहीं भूलती थी. अगर भूल भी जाती तो कहती " जी मैं बिंदी भूल आई हूँ लेते आना" 
जब गजेंद्र बिंदिया ले कर जाता तो कहती थी
"अरे जी ये वाली नहीं चाहिए थी, तुम भी ना एक भी काम ढंग से नहीं करते हो" 
ये सब सोचते सोचते उनकी आँखों कुछ गीली हो जाती थीं.

प्रिया को गये करीब 4 वर्ष बीत गए. उसके जाने के बाद
घर में कई चीज़ें बदलीं, नहीं बदली तो उसकी बिंदी वाली फोटो और उसकी जगह. 

गजेंद्र अब भी प्रिया के साथ उसी कमरे में अपने आप को कैद कर लिया है, मानो प्रिया कह रही हो जी तुम मेरे सामने रहो और रोज़ मेरी बिंदी निहारा करो. जी मैडम, उसने तस्वीर की तरफ देखा और मुस्कुरा उठा.. 

एक छोटी सी बिंदी ने उसका जीवन अभी भी थाम के रखा है...


कोई टिप्पणी नहीं: