विला नं. 20 : लॉयंस डेन
मैं शांत खड़ा है
सुबह की आलसाई धूप में,
जैसे मेरी यादों का
कोई पुराना घर हो
जो अब भी
मेरा नाम पुकारता हो
इनकी खिड़कियों से
हवा नहीं, यादें आती हैं
उनकी हँसी की हल्की गूंज,
जैसे चाय की भाप में
घुली हुई हो ढेर सारी बातें......
बरामदे की कुर्सी जानती है
कितनी शामें वहाँ
चाय के साथ निखरती हैं
और ये फूल गवाह है
उन हसीन पलों के...
ऐसा लगता है
ये विला नहीं
एक ठिकाना है
उन पलों का,
जिनको हम कभी
घर कहा करते थे...
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